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जागें , देशप्रेमी हों..........

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जागें,देश प्रेमी हों.......

जागें , देश-प्रेमी हों  न हों हम धर्म में अंधे, नोचकर ये हम सबको
 करते हैं बड़े काले,अजब धंधे.
मुकद्दस रहीमोराम का
नाम बदनाम करते हैं,
इस दौर के चंद ढोंगी
ऐसे काम करते हैं.
फिर भी श्रद्धा-आस्था इन पर,
रुतबा इनका कायम है
कुकर्म छिपाने को करते
हैं जतन सारे
बच न पाए भी तो,
जेलों में VIP हैं,
लोकतंत्र मुलायम है.
सरकारों का समर्थन है,
 ज़ज्बा इनका कायम है..
अब तक तो मैंने देखा था,
Facebook में ही मैसेंजर
पिछले बरस पता चला
रामरहीम नये वर्जन में मैसेंजर
अब जाके हमको पता चला
आसाराम ड्राइवर था,ये निकला
उसी गाड़ी का बेटिकट पैसेंजर.
न जाने कितने आसा-
रामपाल जैसे दरिंदे हैं,
ये रहेंगे तब तलक
जब तलक हम धर्म में अंधे हैं.
जाग जाओ अंधभक्तों
अब कोई मां-बहन ना रुआंसी हो,
चंगुल में कोई दूसरा हो
उससे पहले इनको फांसी हो.।
जागें, देश-प्रेमी हों
मानवता हो धर्म अपना,
ज्ञान से यशस्वी हो
तब ही साकार होगा बिखरा सपना.।
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खुद पे यकीं ...

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यकीं ( विश्वास )
खुद पे यकीं ,तू कर ले अभी  उड़ चल कहीं ,तू बढ़ चल वहीं. खुद रब से कर ले अरदास अब  मंजिल है तेरे पास अब। तू जो है अब हारा थका, तेरे दर्द था ,फिर भी तू ना रुका., खुद पे यकीं  तू कर ले अभी  उड़ चल कहीं तू बढ़ चल वहीं. रुकना नही  तू झुकना नही  बढ़ करके आगे  तू पीछे हटना नहीं तुझमें है पाने की आग अब  क्यूँ है उनींदा सा जाग अब है तेरी मंजिल बेकरार वो  कर रही तेरा इन्तज़ार वो., खुद पे यकीं  तू कर ले अभी  उड़ चल कहीं तू बढ़ चल वहीं..। अजब ये राह है गजब ये जहां पा जाएगा तू अब  मंजिल है यहाँ. करना नहीं अभी  इनकार तू.. हो जा अभी सिर्फ,तैयार तू करले यकीं ,मेरे यार तू बाजुएं है तेरी  फड़कती बड़ी दिखा अपनी ताकत,  जहां को अभी हो जाएगी कायल  कायनात भी....। खुद पे यकीं  तू कर ले अभी  उड़ चल कहीं तू बढ़ चल वहीं. ★~~~~~~~~~~~~~~~★

माँ ...

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माँ.... मां जब भी देखती है उदास तुम्हें ,  वो वजह ढूंढने की कोशिश   बार -बार करती है, शायद महशूस किया हो तुमने   वो उस पल  तुम्हारी मुस्कुराहट के लिए   बेकरार होती है .। उसकी बेकरारी उस पल,  यूं ही नही होती . वो चाहे खुदा से , तेरी मुस्कुराहट की सलामती मुझे देता हर गम ,बदले में मैं रो लेती .।  मां की ममता अनमोल धरोहर है यारों  पल भर में सारे कष्ट है हर  लेती कोटिशों बार 'सिजदा' करता है मेरा मन कदमों में गिरा देख ,  वो मुझे गले से लगा लेती .।। ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~

ऊपर वाले का पैगाम ......

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ऊपर वाले का पैगाम... ऐ जिन्दगी के मुसाफिर ...... लेता जा मेरी रहमत , तू खुद का है मौला तुझमें है तेरी किस्मत.
बढ़ता रहे तू आगे,
ऐसी होगी सबकी मन्नत. होगी तेरी पैदाइश  वह दुनिया तेरी होगी, वालिद तेरा होगा  मां भी तेरी होगी. मोहब्बत का जहां होगा यादों का निशां होगा , पहले मां-बाप से फिर खुद का पता होगा. मिलूं या ना मिलूं तुझे  वहाँ रोशनी मेरी होगी, कुछ करना नया हर पल जिससे तारीफ तेरी होगी. मैं तो कुछ भी नही मां-बाप तेरे खुदा होंगे, प्यार  देना असीम  नहीं वे तुझसे जुदा होंगे. ग़र मिले कोई भटका  राह उसे दिखाना, दुवाएँ देगा हजारों जब पा जाएगा ठिकाना. जीवन है मुश्किलों से भरा हौसलों के बल लड़ना सिखाना, गिरे व्यक्ति को उठाकर चलना सिखाना. चुनना नये रास्ते  मुश्किलें जहाँ हजारों होंगी, बनाना दुसरों के लिए सुगम  मंजिलें जहाँ हजारों होंगी. करके तू ऐसा  जन्नत पा ही जाएगा , मरने के बाद तू चहेतों को याद आएगा. होगा अगर पैसा  तो श्रद्धान्जलि सभा बुला लेंगे, नही तो 1₹ वाली कैंडल तेरी फोटो के सामने जला देंगे..
After death....
ऐ जिन्दगी के मुसाफिर ...... तुझपे थी मेरी रहमत , तू खुद का था मौला तुझमें थी तेर…

Dedicated To All Parents Of The World.-"नमन".

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" उम्मीद "

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' उम्मीद ' -'किसी वस्तु, विचार,भाव आदि को भविष्य मे              पाने या दृष्टिगोचर होने को उम्मीद कहते हैं ।' इससे मस्तिष्क ऊर्जावान होता है। उम्मीदों से अंधेरों में भी , उजाले नजर आते हैं.  उम्मीद रखने वाले अकेले हो कर भी                       खुद में संवर जाते हैं  . रुखसत होते हैं दुख उनसे ,  वे खुशियों के गीत गाते हैं . गमों से अनजान होते हैं वो, परिस्थितियों से जूझ जाते हैं . आकांछाओं से हार कर के भी , वे उनसे सीख जाते हैं . हार-जीत ,प्रशंसा -आलोचना  कुछ भी मिले उनको,  वे फिर भी मुस्कुराते हैं.... SO PLEASE BE POSITIVE & HOPEFUL AT EVERY STEP Of LIFE....

Dedicated to B.R.Ambedkar

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Dedicated to B.R.Ambedkar. नमन करें उस महापुरुष को, ज्ञान जिसका भगवान था.. देश का गौरव,देश का चिंतक, ऐसी अमिट पहचान था. नमन करें उस महापुरुष को, जीवन जिसका परहित पर कुरबान था. शोषित था दलित,शोषक था कुलीन, किसी को न थी चिंता , सब अहं मे थे लीन. एक वह ही था  जिसे दलितों से अटूट प्यार था, न शोषक,न शोषित हो समाज मे उसे समानता का इंतजार था. पढ़ा देश-परदेश,  उसे खुद को ज्ञानी बनाना था, हकहन्तः कुलीनों को ज्ञान से थप्पड़ लगाना था. नमन करें उस दिव्य पुरुष को, जो ज्ञान का भंडार था. "सर्वजन हिताय-सर्वजन सुखाय",  जिसका ऐसा विचार था. वह चला ज्ञान की राह पर, उसे दलितों को ऊपर उठाना था. उनकी हालत थी बद्  से बदतर, क्योंकि दलित विरोधी जमाना था. भानु-रश्मि सी छटा थी जिसकी, आलोकित दलित-समाज था. भारत का अब्राहम लिंकन था , उसी से स्वर्णिम आज था . दलितों की आशा ,मुकद्दर था उनका, वह ही उनकी पहचान था. होने का उसका फक्र था सबको क्योंकि वह अद्वितीय इन्सान था. नमन करें उस महापुरुष को , ज्ञान जिसका भगवान था...........। ऋणी रहेगा समाज हमारा , उसके प्रदत्त अधिकारों का .। ऋणी रहेगा देश हमारा, उसके अमूल्य उ…